मंदी से बचाने के लिए सरकार ने Corporate Tax में भारी छूट का किया ऐलान

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वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने गोवा में जीएसटी काउंसिल (GST Council) की बैठक से ठीक पहले Corporate Tax में कटौती की घोषणा की। इस घोषणा के तुरंत बाद शेयर बाजार में भारी उछाल देखा गया। GST काउंसिल की बैठक (GST Council Meeting) से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गोवा की राजधानी पणजी में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस प्रेस कांफ्रेंस में उन्‍होंने मंदी से निपटने के कंपनियों पर लगने
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कहा कि एक अध्यादेश लाकर घरेलू कंपनियों, नई स्थानीय विनिर्माण कंपनियों के लिये कॉरपोरेट टैक्‍स कम करने का प्रस्ताव दिया है। अब घरेलू कंपनियों के लिये सभी अधिशेषों और उपकर समेत कॉरपोरेट कर की प्रभावी दर 25.17 प्रतिशत होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नयी दर इस वित्त वर्ष के एक अप्रैल से प्रभावी होगी। उन्होंने कहा कि दर कम करने तथा अन्य घोषणाओं से राजस्व में सालाना 1.45 लाख करोड़ रुपये की कमी का अनुमान है। सीतारमण ने कहा कि निवेश और आर्थिक वृद्धि दर को गति देने के लिये ये कदम उठाये गये हैं। यदि कोई घरेलू कंपनी किसी भी प्रोत्साहन का लाभ नहीं लें तो उनके लिये कॉरपोरेट कर की दर 22 प्रतिशत होगी।केंद्रीय अर्थ व कंपनी व्यवहार मंत्री निर्मला सीतारामन पत्रकार परिषदेत कंपनी करविषयक नव्या धोरणांची घोषणा करताना. सोबत केंद्रीय अर्थ राज्यमंत्री अनुराग ठाकूर व महसूल सचिव अजय भूषण पांडे.@FinMinIndia @nsitharaman @Anurag_Office उन्होंने कहा कि आयकर अधिनियम तथा वित्त अधिनियम में किये गये बदलाव अध्यादेश के जरिये अमल में लाये जाएंगे। उन्होंने कहा कि 22 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान करने का विकल्प चुनने वाली कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर देने की जरूरत नहीं होगी। वित्तमंत्री ने कहा कि एक अक्टूबर के बाद बनने वाली घरेलू विनिर्माण कंपनियां बिना किसी प्रोत्साहन के 15 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान कर सकेंगी। इनके लिये अधिशेषों और उपकर समेत कॉरपोरेट कर की प्रभावी दर 17.01 प्रतिशत होगी। उन्होंने कहा कि छूट का लाभ उठा रही कंपनियां इनकी अवधि समाप्त होने के बाद कम दर पर कर का भुगतान करने का विकल्प चुन सकती हैं। सरकार ने प्रतिभूति लेन-देन कर की देनदारी वाली कंपनियों के शेयरों की बिक्री से हुए पूंजीगत लाभ पर बजट में प्रस्तावित उपकर को भी वापस लेने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिये डेरिवेटिव समेत प्रतिभूतियों की बिक्री से होने वाले पूंजीगत लाभ पर धनाढ्य-उपकर समाप्त करने का भी निर्णय लिया गया है।

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