कोरोना वायरस की चिंता के बीच स्वाइन फ्लू से मिली राहत

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कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर उत्तराखंड में खासी सतर्कता बरती जा रही है। चीन से लौटने वाले लोगों की सघन स्क्रीनिंग की जा रही है। ऐसे तमाम लोग स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में हैं। बहरहाल, कोरोना की दहशत के बीच स्वाइन फ्लू के मोर्चे पर इस बार महकमे को राहत जरूर है। अब तक स्वाइन फ्लू से संबंधित महज पांच ही केस आए हैं। इसमें भी राहत की बात ये कि सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है। बीते कुछ सालों में स्वाइन फ्लू तेजी से सिर उठाता रहा है। इस बीमारी के कारण बीते तीन सालों में ही 25 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। सर्दी के मौसम में इस वायरस के फैलने का सर्वाधिक खतरा बना रहता है। बता दें कि वर्ष 2019 में स्वाइन फ्लू के रिकॉर्ड तोड़ 246 मामले दर्ज किए गए थे। अकेले राजधानी देहरादून के एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में ही दर्जनों मामले सामने आए थे, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया था। अस्पताल की ओर से पांच से ज्यादा मौत में स्वाइन फ्लू की पुष्टि की गई थी जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग को इस अस्पताल के दावों को लेकर डेथ ऑडिट कराना पड़ा था। ऐसे में इस बार भी स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुक्कमल तैयारियां की गई थी। सभी जिलों खासतौर से देहरादून के अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड से लेकर दवा, मास्क आदि की व्यवस्थाएं पहले से ही की चुकी थी। हालांकि, अभी तक स्वास्थ्य विभाग को स्वाइन फ्लू से राहत ही मिली है। आइडीएसपी के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. पंकज सिंह के मुताबिक स्वाइन फ्लू को लेकर तैयारियां पूरी हैं। इसे लेकर पहले ही समस्त जिलों को एडवाइजरी भेज दी गई थी। जिसके हिसाब से अस्पतालों ने अपनी तैयारियां की। फरवरी का महीना खत्म होने वाला है और अब मौसम में बदलाव शुरू हो गया है। हल्की गर्मी भी महसूस होने लगी है लेकिन ठंड का अहसास अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। यही वजह है कि बदलते मौसम में सर्दी, जुकाम, बुखार, बदन दर्द, सिरदर्द, आंखों में जलन, पेट दर्द और फ्लू जैसी बीमारियों का शिकार लोग होने लगे हैं। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. प्रवीण पंवार के अनुसार बदलते मौसम में इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। इस दौरान संक्रमण का भी खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में खानपान और रहन-सहन पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है। उनका कहना है कि बदलते मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को खास एहतियात बरतने की जरूरत है। कोरोना के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे स्वास्थ्य इमरजेंसी घोषित किया है। सरकारी व निजी अस्पतालों में डॉक्टर और पेरामैडिकल स्टाफ एहतियातन मास्क लगाकर मरीजों की जांच कर रहे हैं। इसे लेकर खास सतर्कता बरती जा रही है। यही वजह है कि शहर में इन दिनों मास्क की बिक्री बढ़ गई है। औसतन 100 रुपये कीमत वाला एन-95 मास्क रिटेल स्टोर्स पर 160 से 200 रुपये में बिक रहा है। यही नहीं पहले की अपेक्षा मास्क की बिक्री दोगुनी हो गई है। बताया गया कि दो तरह के मास्क मार्केट में हैं। इनमें एक हरे रंग का टू प्लाई-थ्री प्लाई मास्क होता है। ये मास्क होलसेल में दो से ढाई रुपये तक मिल जाता है, लेकिन अब इनकी कीमत सात रुपये तक पहुंच गई है। ज्यादा डिमांड एन-95 की है। क्योंकि इसे लगाने से धूल के साथ-साथ संक्रमण से बचाव होता है। कैमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन खुराना के अनुसार मास्क की डिमांड बढ़ गई है। ऐसे में यह अलग-अलग जगह अलग दाम पर बिक रहा है। पहले के मुकाबले इसके दाम भी बढ़ गए हैं।

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