धर्म के कुछ फर्जी ठेकेदार पूरी कौम की गुमराह कर रहे हैं : तारिक फतह

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दूसरा नाम बन चुका यह पाकिस्तानी लेखक जब भी कोई ब्यान देता है तो कोई न कोई बखेडा जरुर खडा होता है। हिन्दुस्तान व पाकिस्तान के मुसलमान इनकों दुश्मन मानते हैं। लेकिन यह हर बात खुले मंच पर बिल्कुल निड़र होकर कहते हैं। पाकिस्तान में तो इनका सिर कलम करने तक के लिए इनाम रखा गया है। विवाद के कुछ अन्य ऐसे मामलों को लेकर वरिष्ठ पत्रकार योगेश कुमार सोनी से पाकिस्तानी लेखक तारिक़ फ़तह से एक्सक्लूसिव बातचीत के मुख्य अंश दोनों देशों के मुसलमानों की इतनी नफरत करने की क्या वजह है? क्या आपकी सोच इस्लाम के रास्ते से अलग है?बिल्कुल भी अलग नही है। दिक्कत तो यही है कि पूरी कौम की सोच पर कुछ घटिया लोगों ने अपने काबू में कर रखा है। धर्म के कुछ ठेकेदार बन रहे लोग, मुसलमान युवाओं को आगे ही नही बढ़ने दे रहे। पूरी दुनिया कहां से कहां चली गई लेकिन आज भी हमारे धर्म में दो-तीन शादियां, बाल विवाह और हलाला जैसे कृत्यों को अंजाम दिया जा रहा है। समय के साथ सब बदले हैं लेकिन मुझे लगता है भारत और पाकिस्तान का मुसलमान अभी भी नही बदलना चाहता। हांलाकि कुछ घरानों ने अपनी सोच को अपटेड व अपग्रेड किया है व साथ ही पढ़े लिखे युवा धीरे-धीरे कट्टर माहौल से बाहर भी आ रहे हैं। मैं एक नई सोच का इंसान हूं और ऐसी बातों का विरोध करता रहूंगा। बहुत अच्छा प्रश्न पूछा आपने। मैं कुरान और हदीस के हवाले से बात करता हूं। बाकी मुल्ला-मौलवी या उलेमा आधी बात तबाकर छोड़ देते है। हमारे आखिरी नबी मौहम्मद साहब इस उम्मत (युग) को इतना आरामदायक बनाया कि जिससे हर समस्या का हल बहुत आराम से निकल जाता है। लेकिन धर्म गुरुओं को अपनी दुकान चलाने के लिए हमेशा भोकाल बनाए रखना होता है। बिना तथ्य की बातों से हमेशा नुकसान होता है जो पूरी कौम को उभरने नही दे रहा। उर्दू के जलसे जश्न-ए-रेख़्ता में कुछ नवयुवकों के साथ बातचीत के दौरान आप पर हमला किस बात हुआ था। दरअसल, मैं कुछ युवाओं से बात कर रहा था अचानक कुछ लोग पीछे से आए और गद्दार-गद्दार कहकर चिल्लाने लगे। जब तक मैं कुछ समझ पाता तब तक उन्होनें मेरे ऊपर हमला कर दिया। ऐसे लोगों को अपना दुश्मन कहूं या विरोधी समझ नही आता लेकिन आपके माध्यम से यहीं कहना चाहूंगा कि किसी के भड़कावे में न आएं। इस घटना के बाद आपको किसी भी कार्यक्रम में या अकेले कहीं भी आने-जाने की अनुमति नही थी।अब क्या स्थिति है। उस घटना के बाद मैं कुछ दिनों तक होटल में ही रहा था और बाहर नही निकल पाया था। मैं अपनी बातों को कभी भी, कहीं भी खुलेमंच पर रखने की ताकत रखता हूं। मुझे बिल्कुल भी फर्क नही पड़ता। न जाने कितनी बार मेरे मारने की प्लानिंग हो चुकी। लेकिन एक कहावत है कि ‘जिसको अल्लाह रखे उसको कौन चख्खे’। इसके अलावा उम्र की इस पढ़ाव पर मौत का ड़र किसको है। मैं तो यही चाहता हूं कि मेरी कहे हुए कुछ शब्दों से कोई बदलाव आता है तो मुझे खुशी होगी। आपके ऊपर बीजेपी के हर काम से सहमत रहते हैं। इसके अलावा आप पर खुलकर चमचागिरी का आरोप लगता है। जो ऐतिहासिक काम मोदी सरकार ने कर दिये वो कोई भी नही कर सकता था। धारा 370, 35 ए व राम मंदिर के अलावा हर वो ऐतिहासिक कार्य जिस पर पिछले सत्तर सालों से सिर्फ और सिर्फ राजनीति होती आ रही थी। ऐसे मुद्दों पर राजनीति करने वालों की दुकान बंद हो गई। यदि मैं ऐसे कार्यों की प्रशंसा करता हूं तो क्या गलत है। पूरा देश ऐसे कामों की सराहना कर रहा है। दरअसल मामला यह है कि विपक्षियों को यह लग रहा है कि मोदी सरकार ने जितने भी वादे कर दिए वो सभी लगातार सभी पूरे करते जा रहे हैं, तो अब कैसे घेरा जाए। इसलिए वो कुछ भी कहकर अपनी झेप मिटा रहे हैं। अब यदि सही को सही कहना चमचागिरी है तो कोई क्या कर सकता है।ऐसी बातों का कोई उत्तर नही होता।

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