एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर डीएम समेत 21 पर होगी विभागीय कार्रवाई

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सोनभद्र के बहुचर्चित उभ्भा कांड में शासन ने विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट पर तत्कालीन डीएम अंकित अग्रवाल और एएसपी अरुण कुमार दीक्षित समेत जिला प्रशासन, राजस्व व पुलिस विभाग के 21 अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया है। प्रकरण में सरकारी जमीन को नियमों को दरकिनार कर एक पक्ष को दिए जाने में कई अधिकारी व कर्मी दोषी पाए गए हैं। शासन ने 22 आरोपितों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति भी दी है। आरोपित दो महिलाओं से 1.9 करोड़ रुपये की रिकवरी का आदेश भी दिया गया है। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि सोनभद्र के तत्कालीन डीएम अंकित अग्रवाल, एएसपी अरुण कुमार दीक्षित, एसडीएम जेके दीक्षित, रिटायर सीओ विजय प्रकाश तिवारी, विवेकानन्द तिवारी, सीओ राहुल मिश्रा, सीओ अभिषेक कुमार सिंह, सीओ वीरेन्द्र सिंह, निरीक्षक शिव कुमार मिश्रा, निरीक्षक अरविन्द कुमार मिश्र, निरीक्षक योगेन्द्र बहादुर, उपनिरीक्षक लल्लन प्रसाद यादव, मुख्य आरक्षी मदन कुमार सिंह, मुख्य आरक्षी सुधाकर यादव, मुख्य आरक्षी कन्हैया यादव, आरक्षी प्रमोद प्रताप सिंह, आरक्षी शशिकांत, हवलदार बेनवंशी, सत्यजीत यादव, राम जी प्रसाद, राजेश पांडेय, राम विलास पांडेय, अतुल दूबे व वर्तमान सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, वाराणसी विजय कुमार पांडेय के खिलाफ दायित्वों का निर्वहन न करने व उदासीनता बरतने के साक्ष्य मिले हैं। इन सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। इसके अलावा आरोपित पूर्व एमएलसी की बेटी आशा मिश्रा, तत्कालीन एसडीएम राबर्ट्सगंज अशोक कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन तहसीलदार जयचंद सिंह, तत्कालीन सहायक अभिलेख अधिकारी राजुकमार, निरीक्षक मूलचंद चौरसिया, निरीक्षक आशीष कुमार, उपनिरीक्षक पद्मकांत तिवारी, सुरेश चन्द्र, अखिलेश मिश्रा, कोमल सिंह, ममता सिंह, राज कुमार सिंह, शिवकुमार, यज्ञदत्त सिंह, धर्मेंद्र कुमार सिंह, विवेक सिंह, अनूप कुमार सिंह, गणेश सिंह, शिवानी सिंह, ऊषा कुमारी, सुभराजी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने की अनुमति दी गई है। आशा मिश्रा व विनीता शर्मा उर्फ किरन कुमारी से जमीन बिक्री कर कमाए गए 1.9 करोड़ रुपये की ब्याज समेत रिकवरी का आदेश भी दिया गया है। बता दें कि सोनभद्र के उभ्भा गांव में 17 जुलाई 2019 को विवादित जमीन पर कब्जे को लेकर खूनी संघर्ष हुआ था, जिसमें 11 लोगों की जानें चली गई थीं। प्रकरण में जमीन विवाद की जांच कराने के बाद हजरतगंज कोतवाली में एफआइआर दर्ज कराई गई थी, जिसकी जांच एसआईटी को सौंपी गई थी। एसआईटी ने बीते दिनों कार्रवाई की सिफारिश के साथ अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी।

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