बाबा रामदेव ने बताया कोरोना से लड़ने का आसान उपाय

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अगर बीमारियां हमारे शरीर में हैं तो स्वस्थ होने की शक्ति भी इसी शरीर में छिपी है। तरीके पता हों तो ज्ञानेन्द्रियों पर नियंत्रण ही शारीरिक या मानसिक अवसाद से निकलने की कारगर विधि है। कोरोना काल में आत्म नियंत्रण और आत्मिक शक्ति की जरूरत तो सभी को है ही, योगासन से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और इस समय खुद का ख्याल रखने के लिए जरूरी भी। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है। आज से हर रोज आपको बताएंगे प्रमुख योगासन, विधि और उसके फायदे। आज आपको बता रहे हैं प्राणायाम के बारे में। प्राणायाम शब्द प्राण+आयाम से मिलकर बना है। प्राण का आशय जीवन से है और आयाम से मतलब आदान-प्रदान करना है अर्थात् जीवन के लिए सांसों का आदान-प्रदान आवश्यक है। कपालभाति: कपालभाति में कमर सीधी रखें और सिद्धासन में बैठकर दोनों हाथों को ज्ञान मुद्रा में रखें। श्वास को नाक से तेजी से बाहर छोड़ें व पेट को अंदर की ओर खींचें। ध्यान रखें कि श्वास लेनी नहीं है, सिर्फ छोड़नी है। भस्त्रिका: भस्त्रिका का शाब्दिक अर्थ धौंकनी है। धौंकनी की तरह आवाज करते हुए शुद्ध वायु को अंदर लिया जाता है और अशुद्ध वायु को बाहर फेंका जाता है। तेज गति से श्वास लें और छोड़ें। उज्जायी प्राणायाम: सुखासन में बैठकर मुंह को बंद कर नाक के छिद्रों से वायु को फेफड़ों में भरने तक सांस खींचें। कुछ देर वायु को अंदर ही रखें और फिर नाक के दाएं छिद्र को बंद कर वायु को धीरे-धीरे बाहर निकालें। प्राणायाम में कोरोना जैसी महामारी से बचने और उसके संक्रमण को खत्म करने तक की ताकत है। पांच प्रकार के प्राणायाम से रक्तचाप, तनाव, मधुमेह, हृदय रोग जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है। कोरोना वायरस का संक्रमण ज्यादातर उन्हीं लोगों के लिए खतरा है, जो उपरोक्त में से किसी भी बीमारी से ग्रस्त हैं। नित्य प्राणायाम और सूर्य नमस्कार कर हम इन बीमारियों के खतरे से निश्चिंत रह सकते हैं।

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