दिल्ली में कोरोना के खिलाफ जंग

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राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के बेकाबू होने की आशंका के बीच सभी केंद्र और राज्य सरकार के साथ सभी महकमों को तैयार रहने के लिए कहा गया है। इसके लिए मंगलवार को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अहम बैठक होगी, जिसकी अध्यक्षता उपराज्यपाल करेंगे। इस बैठक के लिए 14 सूत्रीय एजेंडा तैयार किया गया है और एजेंडे का हर प्वाइंट आने वाले दिनों की भयावहता की ओर संकेत कर रहा है। यही बैठक दिल्ली में कोरोना से जंग की नई रणनीति तय करेगी। अधिकारियों के मुताबिक स्टेडियमों में बनाए जाने वाले अस्पतालों में डॉक्टरों और मरीजों का फेस टू फेस संपर्क नहीं होगा। इसके विपरीत यहां ऑक्सीजन सिलेंडर, वेंटिलेटर, आइसीयू और मेडिकल स्टाफ की मदद से कोरोना संक्रमितों का उपचार किया जाएगा। इनके अलावा आरडब्ल्यूए की मदद से सामुदायिक भवनों और खाली पड़े फ्लैटों को भी अस्थायी अस्पताल में बदला जाएगा। यहां सिविल डिफेंस स्टाफ की ही मदद नहीं ली जाएगी बल्कि आरडब्ल्यूए सदस्यों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। डॉक्टरों की संख्या सीमित होने के चलते कोरोना संक्रमितों को समय समय पर वाट्सएप व एसएमएस से भी उपचार का प्रीस्क्रिप्शन भेजा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक सभी संभावित प्रयासों के बावजूद कोरोना संक्रमण से बड़ी संख्या में मौत होने की संभावना है। मौजूदा समय में भी श्मशान घाट एवं अस्पतालों के मुर्दाघर नाकाफी साबित हो रहे हैं। इसी के मद्देनजर अस्पतालों में बड़े- बड़े कंटेनरों में एसी और बंक बेड (कई बर्थ वाले बिस्तर) की सुविधा के साथ शवों को रखने की तैयारी की जा रही है ताकि जब तक उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था न हो जाए, उन्हें सुरक्षित रखा जा सके। सभी डीएम को अस्थायी श्मशान घाटों के लिए जमीन चिह्नित करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। इसके अलावा कोरोना मरीजों के लिए निजी अस्पतालों में उपचार एवं एंबुलेंस सेवा की शुल्क दर भी घटाई जाएगी। लैब की मदद से कोविड-19 की जांच बढ़ाने और जांच शुल्क कम करने की भी योजना है। साथ ही सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों की सहायता से ऐसी टेलीफोनिक हेल्पलाइन सेवा शुरू किए जाने पर भी विचार किया जा रहा है जिस पर सातों दिन 24 घंटे मरीजों व उनके परिजनों को सलाह मिल सके।

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