HomeUncategorizedक्रिकेट की तरह ही है नवजोत सिद्धू का सियासी सफर

क्रिकेट की तरह ही है नवजोत सिद्धू का सियासी सफर

पंजाब कांग्रेस के अध्‍यक्ष बने नवजोत सिंह सिद्धू का सियासी सफर उनके क्रिकेट करियर की तरह ही रहा है। क्रिकेट के मैदान में संन्‍यास के बाद शानदार रिटर्न किया तो सियासत में ‘वनवास’ के वाद जबरदस्‍त वापसी की है।  कभी वकार यूनिस की गेंद पर जीरो पर आउट होने के बाद सिद्धू जैसे ‘ सिक्‍सर किंग’ बने, वैसा ही जज्‍बा उन्‍होंने राजनीति की पारी में भी दिखाया है। क्रिकेट के मैदान में अपने छक्‍कों के लिए मशहूर रहे सिद्धू ने राजनीति में हैट्रिक बनाया और अमृतसर से लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव जीते। सिद्धू के बारे में खास बात यह है कि क्रिकेट में भी उनका अपने कप्‍तान से विवाद हुआ और इस कारण अचानक संन्‍यास ले लिया और अब राजनीति के कैप्‍टन से भी उनका विवाद हुआ और मंत्री पद छोड़कर ‘सियासी संन्‍यास’ पर चले गए। फिर क्रिकेट मैदान में रिटायरमेंट से लौटे और अब सियासत में भी जोरदार ‘कमबैक’ किया है। नवजोत सिंह सिद्धू ने अपना राजनीतिक सफर 2004 में शुरू किया था। भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने 2004 में सिद्धू को भाजपा में शामिल किया था। इसके बाद सिद्धू हमेशा जेटली का अपना सियासी गुरु मानते रहे, भाजपा में रहने के दौरान भी और उसे छोड़ने के बाद भी। 2004 में ही सिद्धू ने पहली बार अमृतसर लोकसभा सीट से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ा। सिद्धू ने कांग्रेस के कद्दावर नेता रघुनंदन लाल भाटिया को 1,09,532 वोटों से हराया।

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भाजपा से की शुरूआत और कांग्रेस में बने पंजाब के सरदार, की सियासी वनवास से जबरदस्‍त वापसी

सिद्धू ने पटियाला के गैर इरादतन हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से फैसला देने से पहले लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। सुप्रीम कोर्ट की ओर से चुनाव लड़ने की इजाजत मिलने के बाद 2007 में अमृतसर से ही उपचुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस नेता सुरिंदर सिंगला को हराया।

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